वाराणसी क्षेत्र

काशी जनपद के रूप में वाराणसी की प्रसिद्धि थी। किन्तु धार्मिक दृष्टि से पवित्रकाशी क्षेत्र के अन्तर्गत वाराणसीक्षेत्र को और पवित्र माना जाता था। धीरे-धीरे जनसामान्य और लोकव्यवहार में दोनों के मध्य जो अन्तर था वह समाप्तप्राय हो गया। वस्तुत: वाराणसी क्षेत्र, काशी क्षेत्र के अन्तर्गत है और भौगोलिक दृष्टि से उससे छोटा है-

द्वियोजनं तु तत्क्षेत्रं पूर्वपश्चिमत: स्मृतम्।
अर्द्धयोजनविस्तीर्ण तत्क्षकत्रं दक्षिणोत्तरम्।।
वाराणसी तदीया च यावच्छुाष्कनदी तु वै।
भीष्मसचडिकमारभ्या पर्वतेश्वरमन्तिके।।
वरणायास्तदथैवास्या मध्ये वाराणसी पुरी।।
दक्षिणोत्तरयोर्नद्यौ वरणासिश्च् पूर्वत:।
जाह्नवी पश्चिमे चापि पाश्पाणिर्गणेश्वर।।
द्वियोजनपं तु पूर्व स्या्द्योजनार्द्ध तदन्यथा।।
वरणा च नदी चासी मध्ये् वाराणसी तयो:।।

पुराणादिकों में अनेक सन्दर्भ मिलते हैं जो कि परस्पर एक दूसरे से अलग अलग प्रतीत होते हैं, किन्तु् इनका गम्भीर अध्यययन करने पर भ्रम का निवारण भी हो जाता है।