श्रीविश्‍वनाथ माहात्‍म्‍य



विभिन्न ग्रन्थो में मनुष्य के सर्वविध अभ्युदय के लिए काशी विश्वनाथ जी के दर्शन आदि का महत्व‍ विस्ता‍रपूर्वक प्रतिपादित किया गया है। इनके दर्शनमात्र से ही सांसारिक भयों का नाश हो जाता है और अनेक जन्मों के पाप आदि दूर हो जाते हैं। काशी विश्वेश्वर लिंग ज्योतिर्लिंग है जिसके दर्शन से परमज्यो्ति को मनुष्य पा लेता है। सभी लिंगों के अर्चन से सारे जन्म में जितना पुण्य् मिलता है उतना तो केवल एक ही बार श्रद्धापूर्वक किए गए विश्वनाथ के अर्चन से मिल जाता है। सहस्रों जन्मों के पुण्य के ही फल से विश्वनाथजी के दर्शन का अवसर मिलता है-

काश्यां विश्वेश्वरो देव: संसारभयनाशनम्।
नैकजन्मकृतं पापं दर्शनेन विनश्यति।।
काशीविश्वेश्वरं लिंग ज्योरतिर्लिगं यदुच्यते।
तद्दृष्ट्वा परमं ज्योतिराप्नोति मनुजोत्तम:।।
सर्वलिंगार्चनात्पुण्यं यावज्जन्म यदर्ज्यते।
सकृद्विश्वेशमभ्यर्च्य श्रद्धया तदवाप्यते।।
यज्ज्न्मनां सहस्रेण निर्मलं पुण्य्मर्जितम्।
तत्पुण्यपरिवर्तेन भवेद्विश्वेशदर्शनम्।।

मुक्ति पाने के लिए लोग न जाने क्यां क्या उपाय करते रहते हैं, कहीं योग तो कहीं देवताओं की विविध प्रकार से पूजा आदि आदि। अरे, काशी में तो मुक्ति सहज ही मिलती है, क्योंकि विश्वेश की सेवा ही यहाँ योग है और काशी में रहना ही तप है।

क्व् योगयुक्ति: क्व् च दैवतेज्या् काश्यां विनैभि: सहजेन मुक्ति।
विश्वेशसंशीलनमेव योगस्तपश्च विश्वे‍शपुरीनिवास:।।