मन्दिर परिसर के अन्तंर्गत देव मन्दिर



मन्दिर परिसर के अन्तंर्गत विश्वेश्वर ज्योयतिर्लिंग के अतिरिक्त अन्य अनेक शिवलिंग तथा विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियॉ स्थापित हैं। वर्तमान मन्दिर का विस्तार पूर्व की ओर किया गया है। विस्तार से पूर्व के मन्दिर परिसर में पूर्व-ईशान के मध्य गर्भगृह में श्री विश्वेश्वर का ज्योतिर्लिग स्थापित है, गर्भगृह के पश्चिम मण्ड्प में (जो मुख्यृद्वार से प्रवेश करते समय सामने है) श्री बैकुण्ठ‍नाथ है। विश्वनाथ जी के अग्निकोण में श्री अविमुक्तेरश्वर लिंग है जिन्हें कि विश्वेश्वर जी का गुरु मानने की परम्परा है तथा जिनके दर्शन के बिना विश्वेश्वर की यात्रा पूरी नहीं होती। वही शालामण्ड‍प में अन्य अनेक लिंग स्थापित है जो कि समय-समय पर सन्त-महापुरुषों द्वारा स्थापित किए गये हैं। मुख्य‍ प्रवेश द्वार के बांयी ओर में सत्यनारायण जी विराजमान हैं। वहॉं से आगे परिक्रमा मार्ग में पुन: अन्य देवता तथा लिंग स्थापित है। पश्चिम दीवाल के मध्यं भाग में द्वार के ठीक सामने बाहर की ओर हनुमान जी विद्यमान हैं। वायव्य कोण के कक्ष में अहिल्याबाई की मूर्ति स्था‍पित है। वहीं गणेश तथा पार्वती जी की पूजा होती है। तदन्तर उत्तरी शाला में वैदिक विद्वान बैठकर रुद्रपाठ करते रहते हैं। अभिषेक-पूजा आदि करने वाले श्रद्धालु भी यहाँ बैठकर पूजा करते हैं, ईशानकोण में भगवती अन्नपूर्णा जी विराजमान हैं।